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सिंधु घाटी सभ्यता

                                                              हड़प्पा सभ्यता का सामाजिक जीवन हड़प्पा सभ्यता का सामाजिक जीवन अत्यंत संगठित और उन्नत था। इस सभ्यता के लोग नगरों में व्यवस्थित ढंग से रहते थे और उनकी जीवनशैली कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर आधारित थी: 1. ** सामाजिक संरचना ** –  हड़प्पा सभ्यता में वर्ग विभाजन स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं था, लेकिन पुरातात्विक खोजों से यह संकेत मिलता है कि समाज विभिन्न वर्गों में संगठित था। यह विभाजन मुख्य रूप से व्यवसाय, सामाजिक भूमिकाओं और आर्थिक गतिविधियों पर आधारित था। हड़प्पा सभ्यता में संभावित वर्ग विभाजन: 1. - व्यापारी और शिल्पकार – हड़प्पा सभ्यता में व्यापार अत्यंत विकसित था। व्यापारी वर्ग स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संलग्न था, जबकि शिल्पकार मिट्टी, धातु और पत्थर से वस्तुएँ बनाते थे। 2. **किसान और श्रमिक** – अधिकांश लोग कृषि और पशुपालन...

प्रमुख्य एतिहासिक तिथियां व घटनाएं

563 या  576   ई० पू ० -  गौतम बुध का जन्म 483 ई० पू ० - गौतम बुध की मृत्यु 599 ई०पू ० -  महावीर स्वामी का जन्म हुआ 950 ई०पू -  महाभारत का युद्ध  600 से 550 उपनिषदों का रचनाकाल 533  ई०पू  महात्मा बुध का गृह त्याग  527  ई०पू  महावीर स्वामी की मृत्यु हुई  492 ई पूर्व अजातशत्रु का राज्यारोहण  483  ई०पू  महात्मा बुद्ध की मृत्यु हुई  468  ई० पू ०  पूर्व महावीर की निर्माण तिथि  336  ई०पू  सिकंदर का राज्यारोहण  326 -327  ई० पू ०  सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया  322 से 323  ई० पू ०  चंद्रगुप्त मगध का सम्राट बना और उसने मगध पर अपने वंश की स्थापना की  323  ई० पू ०  सिकंदर की मृत्यु  305  ई० पू ० सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त मोर पर आक्रमण किया चंद्रगुप्त मौर्य पर आक्रमण किया जिसमें वह पराजित हुआ  298  ई० पू ०  चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु ओम बिंदुसार का राज्यारोहण  273  ई० पू ० अशोक मगध की गद्दी पर बैठा  269  ई० पू ...

जैन धर्म

                                                                                             जैन धर्म विश्व का एक प्राचीन धर्म है जो उस दर्शन में निहित है जो समस्त  जीवित प्राणियों को अनुशासित, अहिंसा के माध्यम से मुक्ति का मार्ग एवं आध्यात्मिक शुद्धता और आत्मज्ञान का मार्ग सिखाता है।छठी शताब्दी ईसा पूर्व में जब भगवान महावीर ने जैन धर्म का प्रचार किया तब यह धर्म प्रमुखता से सामने आया।इस धर्म में 24 महान शिक्षक हुए, जिनमें से अंतिम भगवान महावीर थे।इन 24 शिक्षकों को तीर्थंकर कहा जाता था, वे लोग जिन्होंने अपने जीवन में सभी ज्ञान (मोक्ष) प्राप्त कर लिये थे और लोगों तक इसका प्रचार किया था।प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ व अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी थे।'जैन' शब्द जिन या जैन से बना है जिसका अर्थ है 'विजेता'।समस्त तीर्थंकर...